Vashikaran ke Achuk Upay, Totke in Hindi

वशीकरण के अचूक टोटके, उपाय हिंदी में

प्रेमी या पति वशीकरण मंत्र by Best Vashikaran Specialist

अगर प्रेमी या पति का मन भटक गया हो, किसी दूसरी स्त्री में आसक्त हो गया हो या उससे प्यार न मिलता हो तो यह प्रयोग सफलतादायक है । शुकवार के दिन पति के पैरो के नीचे की धूल या कंकर लेकर किसी पात्र में रख दे और फिर तेल का दीपक लगाकर निम्न मंत्र की दस माला फेरे ।

मंत्र –
जंगल की योगिनी पाताल में नाग उठ गए मेरे वीर
लाओ मेरे पास जहाँ जहाँ जाए मेरे सहाई तहां तहां
आव कजभरी नजभरी अंतासों अगरी तक नफे तक
एक फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा मेरे गुरु का वचन साँचा
जो न जाय वीर गुरु गोरखनाथ की दुहाई।

शत्रु वशीकरण by Vashikaran Specialist in Bangalore
रवि पुष्प को अखंडित भोजपत्र पर शत्रु का नाम अष्टगंध से निम्न लिखकर शुद्ध मधु में डालकर उसे बंद करके किसी ऐसे स्थान पर रख दे जहाँ से वो नजर न आए। निम्न मंत्र का 108 बार जप भी कर दे —
मंत्र –
ओं ताल तुम्बरी दह दहदरे भाल भाल
आं आं हूं हूं हूं हें हें हें काल कमानी कोट
करिया ओं ठ: ठ:।

प्रेमिका वशीकरण

अगर सामाजिक बंधनो के कारण या दो परिवारों के मध्य द्वेष के कारन अथवा परस्पर मतभेद हो जाने के कारण प्रेमिका का मन बदल गया हो और वह न मिलती हो तो यह प्रयोग भरपूर प्रभाव रखता है । प्रयोग पूरा होते ही वह स्वयं आकर प्रेमी से मिलती है ।

शुक्रवार के दिन लोबान धुप लगा दे, अपने सामने साध्य का चित्र रखकर उस पर निम्न मंत्र की इक्कीस मालाएं फेरे —

झरझर बहे कपाल फटे, नाथ का बुंदा पांव।
पड़े, गोरख राज सत्य, कहे, तिरिया का।
रूप वही धरे, शब्द साँचा पिण्ड कांचा।
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा॥

सर्वजन वशीरण मंत्र

मोर का पंख और कोचनी के फूल प्रातः काल काली गऊ के दूध में खीर पकाकर मंत्र पढ़कर अग्नि में आहुति डाले और अपने चित्त में वश करने वाले का ध्यान करे तो तत्काल सिद्धि होती है ।

मंत्र:
ॐ नमो कामदेवाय महाप्रभाय हीं कामेश्वरी स्वाहा।

वशीकरण तिलक

गोरोचन, वंशलोचन, मछली का पित्त, शुद्ध केसर, लाल चन्दन की जड़, इन सबको समभाग लेकर जल में सबको कूट पीसकर कुवारी कन्या के हाथ से उसकी गोली बनवा ले और छाया में सुखाये। फिर समय पर उस गोली को घिसकर चन्दन लगाकर जहा जाये और जो देखे, वश में हो जायेगा। अगर संभव हो तो उन गोलियों पर निम्न मंत्र का जाप भी कर ले। मंत्र इस प्रकार है —–

ॐ हीं क्लीं एल्लो भोगप्रदा भैरवी मातंगी त्रैलोक्या
वशमानया स्वाहा।

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